- आजकल मैंने देखा हैं की शहर हों या गावं घर मैं अगर कोई खुश हैं तो लोगो मैं एक विष्फोट करने का रिवाज सा चल गया हैं लोग शादी हो या कोई खुशी का माहोल तब बन्दूक से गोली चलाकर खुशी का इशाहर करते हैं लेकिन यह सब कर के कभी कभी खुशी गम मैं तप्दील हो जाती फ़िर लोग मानते नही हैं और खुसी मैं अपने आपको भूल जाते हैं विष्फोट बाज़ी करने लगते हाँ और वह चोट वह किशी के भी लग जाती हैं कुशी मैं दुःख का माहोल हो जाता हैं और वह पल बहुत गमी मैं बदल जाता हैं इस तरह की घटनों से दिन पर दिन बहुत लोगो की जान भी जा रही हैं फ़िर समाज नही मानता इस पर प्रशासन को जल्द की किसी न किसी तरह की बाँधा डालनी चाहिए जिससे इस तरह की घटनाओं न हों
शनिवार, 21 फ़रवरी 2009
खुश्यों मैं मातम
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